खामोशी की आवाज़
खामोशी भी कभी बोलती है,जब शब्द थक जाते हैं।कुछ अनकहे जज़्बात,मौन में ही सुलझ जाते हैं।
❤️ 0
💬 0
अपनी पसंद की भाषा और विधा में साहित्य पढ़ें
खामोशी भी कभी बोलती है,जब शब्द थक जाते हैं।कुछ अनकहे जज़्बात,मौन में ही सुलझ जाते हैं।
माँ की रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं पकता,वहाँ यादें पकती हैं।हर स्वाद में बचपन घुला होता है।
खामोशी भी कभी बोलती है,जब शब्द थक जाते हैं।कुछ अनकहे जज़्बात,मौन में ही सुलझ जाते हैं।
माँ की रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं पकता,वहाँ यादें पकती हैं।हर स्वाद में बचपन घुला होता है।