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Poem
खामोशी की आवाज़

खामोशी की आवाज़

खामोशी भी कभी बोलती है,जब शब्द थक जाते हैं।कुछ अनकहे जज़्बात,मौन में ही सुलझ जाते हैं।

Reena Kumari Prajapat
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Story
माँ की रसोई

माँ की रसोई

माँ की रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं पकता,वहाँ यादें पकती हैं।हर स्वाद में बचपन घुला होता है।

Reena Kumari Prajapat
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Poem
खामोशी की आवाज़

खामोशी की आवाज़

खामोशी भी कभी बोलती है,जब शब्द थक जाते हैं।कुछ अनकहे जज़्बात,मौन में ही सुलझ जाते हैं।

VINAY KAUSHIK
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Story
माँ की रसोई

माँ की रसोई

माँ की रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं पकता,वहाँ यादें पकती हैं।हर स्वाद में बचपन घुला होता है।

VINAY KAUSHIK
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