खामोशी की आवाज़
✍️ Reena Kumari Prajapat
📅 23 Jan 2026
🕒 1 min read
📝 0 words
खामोशी भी कभी बोलती है,
जब शब्द थक जाते हैं।
कुछ अनकहे जज़्बात,
मौन में ही सुलझ जाते हैं।
About the Author
मेरा नाम रीना कुमारी प्रजापत है मुझे लिखने में, पेंटिंग में, हैंडक्राफ्टिंग और गार्डनिंग में बड़ी ही दिलचस्पी है और मेरी एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है जिसका नाम "दास्तां - ए - शायरा" है। मुझे प्रकृति और एकांतता से बहुत प्यार है।
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